समय बीतता जाता है और उसके साथ हम भी। पर जो समय अभी बीता ही नहीं, उसे बीता हुआ मान लेना ठीक नहीं है। जो रेत मुट्ठी में बाकी है, उसे तो कम से कम यूं ही फिसलने से रोका जा सकता है। अब भी सात दिन बाकी...from Live Hindustan Rss feed http://bit.ly/2ENcgAF
समय बीतता जाता है और उसके साथ हम भी। पर जो समय अभी बीता ही नहीं, उसे बीता हुआ मान लेना ठीक नहीं है। जो रेत मुट्ठी में बाकी है, उसे तो कम से कम यूं ही फिसलने से रोका जा सकता है। अब भी सात दिन बाकी...Please enter a description
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